जब माँ ने कहा – "तेरे पास कोई समझ नहीं है..."
जब माँ ने कहा – "तेरे पास कोई समझ नहीं है..."
मैं छोटा था… चीज़ों को समझने की कोशिश करता था।
एक बार मैंने कुछ गलत फैसला ले लिया… बस एक छोटी सी गलती।
पर माँ ने गुस्से में कह दिया –
"तेरे पास तो कोई समझ ही नहीं है!"
वो शब्द ऐसे लगे जैसे किसी ने दिल में पत्थर मार दिया हो।
उस दिन पहली बार लगा कि मैं शायद सच में बेवकूफ हूँ।
लोग मुझे 'सीधा-सादा' कहते थे, लेकिन माँ के वो शब्द हर बार कानों में गूंजते रहे।
मैंने धीरे-धीरे खुद पर शक करना शुरू कर दिया।
हर बार जब कोई फैसला लेना होता – मैं डर जाता…
"अगर फिर से गलती हो गई तो?"
और ऐसा करते-करते, मैं अपनी ही दुनिया में खो गया।
🌟 लेकिन आज...
मैंने अपनी ज़िंदगी को बदल दिया है।
गलतियाँ मेरी पहचान नहीं थीं – वो मेरी सीख थीं।
माँ ने गुस्से में कहा था – प्यार में नहीं सोचा था कि वो मुझे कितना तोड़ देगी।
अब जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ,
तो समझ आता है –
"ताकत समझ में नहीं, विश्वास में होती है।"
✅ Solution – क्या आपने भी कभी अपनों की बातों से खुद पर शक किया है?
भाई, अगर तुम भी किसी के शब्दों से खुद को बेकार समझने लगे हो…
तो याद रखो –
लोग क्या कहते हैं, वो उनके मूड की कहानी है, तुम्हारी सच्चाई नहीं।
✅ खुद पर भरोसा रखो
✅ गलतियाँ तुम्हें आगे बढ़ना सिखाती हैं
✅ तुम अकेले नहीं हो – मैं तुम्हारे साथ हूँ
अगर कभी तुम्हारे अपने ही शब्दों से तुम्हें चोट पहुँची है…
तो बस एक बार comment करो – "Yes",
और हम मिलकर उस दर्द को ताकत में बदलेंगे।

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💬 "Kya aapne bhi kabhi aisa feel kiya hai jaise meri story mein likha hai?
Aapke ek honest comment se mujhe nahi, kisi aur ko clarity mil sakti hai.
✨ Apni real feeling likhna niche comments mein – main har ek reply zaroor padhunga.
Let’s connect real to real, not reel to reel. ❤️"